हरियाणा सरकार ने जरूरतमंद परिवारों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालु) को अब डिजिटल रूप में उपलब्ध करा दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार को दयालु–II पोर्टल का शुभारंभ करते हुए स्पष्ट किया कि अब प्रदेश में किसी भी नागरिक को लावारिस या बेसहारा पशुओं की टक्कर से हुई दुर्घटना के मामलों में वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए किसी प्रकार की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
पोर्टल से आवेदन करने की सुविधा शुरू
सरकार द्वारा शुरू किए गए इस पोर्टल के माध्यम से पात्र परिवार अब सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक को केवल आवश्यक विवरण और दस्तावेज dapsy.finhry.gov.in पोर्टल या जन सहायक मोबाइल ऐप के जरिए अपलोड करने होंगे। इससे आवेदन प्रक्रिया न सिर्फ सरल होगी बल्कि समय की भी बचत होगी।
कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता?
दयालु योजना के तहत प्रदेश सरकार उन परिवारों को वित्तीय मदद देती है जिनके किसी सदस्य की लावारिस या बेसहारा पशुओं की टक्कर से मौत या दिव्यांगता हो जाती है।
- मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में पीड़ित परिवार को 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
- चोट लगने की स्थिति में न्यूनतम 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस सहायता राशि को सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाएगा। इससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी और गलतियों की गुंजाइश भी कम होगी।
परिवार पहचान पत्र अनिवार्य
योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनके पास परिवार पहचान पत्र (PPP) मौजूद है। आवेदन के दौरान इसे अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
सरलीकरण और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि दुर्घटना से प्रभावित परिवारों तक सहायता राशि तेजी से और सटीकता के साथ पहुंचे, इसी उद्देश्य से पोर्टल तैयार किया गया है। पहले आवेदन प्रक्रिया में कई बार देरी और तकनीकी दिक्कतें सामने आती थीं, लेकिन अब डिजिटल प्रक्रिया से यह पूरी तरह आसान और सीधी हो जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पोर्टल सरकार की सरल, सुगम और पारदर्शी सेवा प्रदाय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दयालु-II पोर्टल की शुरुआत से अब हरियाणा के जरूरतमंद परिवार बिना किसी परेशानी के ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और लावारिस पशुओं से दुर्घटना होने पर मिलने वाली सहायता राशि का लाभ आसानी से उठा पाएंगे। सरकार की यह डिजिटल पहल निश्चित रूप से राहत पाने की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाएगी।